Friday, 1 September 2017
Wednesday, 30 August 2017
__________एडमिशन की भागदौड़.... फोटोकॉपी से लेकर फोटो ख़िचवाने तक की गहमा-गहमी.... पूरे Convention center में कोई ऐसा नहीं था जिसे नज़रें पहचानती हों। सब भाग रहे थे, हाथ में फ़ाइल थामें, एक हॉल से दूसरे हॉल... मशीनों की तरह...
____"excuse me!
____किसी ने धीरे किन्तु स्पष्ट आवाज़ में कहा।
____बेहद साधारण नैन नक्श वाली वो लड़की, जिसे अभी पिछले ही हॉल में देखा था, होठों पे स्निग्ध मुस्कान लिए ठीक पीछे खड़ी थी। इकहरा बदन, बेबी कट बाल, सादी सी टी-शर्ट, बमुश्किल एक तिहाई टांगों को ढके हुए नीली जींन्सनुमा कैप्री के साथ हल्के गुलाबी रंग के जूते पहने थे उसने।
____"where is the auditorium hall-2 ?"
____समझ में तो कुछ नहीं आया पर एक्सेंट बड़ा प्यारा था उसका। ठीक-ठाक अंग्रेजी न बोल पाने का अफ़सोस पहली बार सबसे ज्यादा हो रहा था। प्रश्नवाचक ढंग से हमारा खुला हुआ मुँह देखकर लगभग उतनी ही जल्दबाजी में मैडम नें वही वाक्य दोहराया...।
____"this way please !..." -हड़बड़ाहट में मुँह से निकला। एक संक्षिप्त किन्तु अर्थपूर्ण (हमारी कल्पनानुसार) मुस्कान के साथ अंग्रेजी में धन्यवाद जैसा कुछ बड़बड़ाती हुई, छोटे-छोटे कदमों से 'बेबी कट' चली गईं । इस छोटे किन्तु सटीक वाक्य नें पूरे उन्माद से सीना चौड़ा कर दिया था। मन में आया कि बी ग्रेड भोजपुरिया पिच्चर के हीरो की तरह, फाइल को हवा में उछाल के बस नाचना शुरू कर दें।
_________School of Language की formalities ने बेहद थका दिया था। आख़िर प्रक्रिया सम्पन्न हुई। एडमिशन की ख़ुशी चेहरे से झलक रही थी। SL से बाहर निकले ही थे कि सामने से एक और ख़ुशी आती हुई दिखाई दी। मिस 'बेबी कट' सामने से चली आ रही थी, अकेले... डरी सहमी सी, चेहरे पर गंभीरता का ऐसा भाव मानो दमपिशाचों ने उनकी ज़िन्दगी से सारी ख़ुशियाँ ही चूस ली हों। परफ्यूम की हल्की मादक ख़ुशबू हमारे ख़याली पुलाव को आँच दे रही थी। मैडम बगल की सीढ़ियों से ऊपर जा रहीं थी। एक पल के लिए अपनी शर्ट से आती पसीने की प्राकृतिक महक की, मादक ख़ुशबू से तुलना करने का ऐतिहासिक विचार मन में आया किन्तु अगले ही पल एक नये विचार ने पुराने को धराशाही कर दिया। नया विचार अपेक्षाकृत ज़्यादा क्रान्तिकारी था।--- 'मैडम की तरफ़ अंग्रेजी के दो-चार महंगे वर्ड फेंकते हुए, उनका नाम पूछना था' । आख़िर एक पन्ने पर रूपरेखा तैयार की गई- 'excuse me!', 'ohh hello', 'सुनिए', 'सुनो तो', 'अच्छा एक बात कहें'..... वगैरह।
____अभी शब्द निर्धारण की प्रक्रिया प्रगति पर ही थी कि मोहतरमा आती दिखाई दीं।
____"सुनिए...!"
____"आप हिन्दी से हैं?"
____"न्यों आई ऐम फ्रॉम लिंग्विस्टिक"
____"सॉरी!" -अंतिम बार समझ पाने की निर्रथक चेष्टा की हमने!
____"I am from linguistic and the language that i............"
____इस बार कुछ ज्यादा ही लम्बा बोले जा रही थी मैडम, शायद मज़ा लेने का ये उनका तरीका था । विद्यालय की वातानुकूलित हवा भी इस बार हमारे माथे से फिसलते पसीने को रोकने में सफल न हो पाई। कुछ खास तो नही पर इतना जरूर समझ आ गया कि मिस 'बेबी कट' अगले दो साल तक हमारी ही बिल्डिंग में पढ़ने वाली हैं। हम मुड़े और एकदम नाक की सीध में चलते हुए SL से बाहर निकल गये....
Sunday, 27 August 2017
Dear 'kaddu'...
असल ज़िन्दगी में मैंने जुनून की हद तक पागल इंसान कम ही देखे हैं। 'हैरी पॉटर' के उन विशुद्ध ख़याली चरित्रों के प्रति तुम्हारा लगाव, पागलपन की जीवन्त पराकाष्ठा ही तो है। पर सुख़द है ये पागलपन, क्योंकि ये तुम्हे ले जाता है सबसे परे, हर रोष, हर ग़म, हर हताशा से एकदम इतर... कहीं बड़ी दूर।
तुम्हारे अन्तर्मन में चलते द्वन्द्व को कभी कोई समझ ही नही पाया, इमानदारी से कहें तो तुमने कभी उसे समझने का मौका ही नहीं दिया, न अपने परिवार को और न ही कऱीबियों को। तुम्हारी हताशा,तुम्हारी ख़ुशी, हमेशा तुम्हारी अपनी ही रहीं... एकदम निजी। तुम्हारी सहेलियों में कोई कभी ऐसी हुई ही नहीं जो तुम्हे समझ पायी हो, या जिससे तुम अपना जीवन साझा कर पाई हो। बुनियादी तौर पर कम से कम मुझे तो ऐसा ही लगता है। विगत कुछ वर्षों में शायद एकाध प्रतिशत ही जान पाये हैं तुम्हे। तुम्हे समझना काफी हद तक वैसा ही है जैसे 'जादू की त्रिकोणीय श्रंखला जीतना' ।
पता है हमें उस 'बंद जगह' के लिए तुम कभी बनी ही नहीं थी। तुम तो वो थी जो नवोदय की हज़ार पाबन्दियों के बीच चोरी-छिपे हॉस्टल की सबसे ऊंची वाली छत पे चढ़ के क्षितिज तक फ़ैले उन्मुक्त आकाश को घण्टों निहारने में ही खुशी महसूस करती थी, तुम वो थी जो किसी रोज़ पानी की सबसे ऊँची वाली टंकी में चढ़कर उन्माद से चिल्लाने के ख़्वाब देखती थी, जो चुपचाप आइने के सामने बेतरतीब ढंग से चेहरा बनाती-बिगाड़ती और उसी में खुश हो लिया करती थी , तुम वो थी जो झाड़ू में बैठकर उड़ जाना चाहती थी और तुम वो भी थी जो छोटी लकड़ी को जादुई छड़ी नुमा पकड़ कर एक दिन सबको 'निरस्त्र' कर देना चाहती थी।
पता है 'हैरी पॉटर' की जिस काल्पनिक दुनिया में जीना पसंद है ना तुम्हे, यहां 'JNU' में काफी हद तक वैसी ही दुनिया देखता हूं मैं। Library है यहां पूरे 9 माले की,और हाँ अपना 'हिन्दी सेक्शन' पाँचवे माले पर है। किताबों के बीच अक्सर घूमते हुए देखता हूँ तो दिल्ली, दिल्ली जैसे लगती ही नहीं। चारो ओर हरियाली ही हरियाली है। कहीं दूर किन्तु स्पष्ट दिखाई देती है यहाँ से ऐतिहासिक 'कुतुबमीनार'। बस स्वर्ग की तरह ही लगता है ये नज़ारा। हज़ारो किताबें अटी पड़ी हैं यहाँ। तुम्हे किताबों से विशेष लगाव रहा है न! वास्तव में ये तुम्हारी ही जगह होनी चाहिये थी।
आना कभी यहाँ घूमनें, अच्छा लगेगा! 'PSR' की बेडौल चट्टानों पर गाढ़ी मीठी चाय पीनी हो, या 'साबरमती ढाबा' की स्पेशल 'कचौरी विद छोले', सब खिलाएंगे तुम्हे।
___आख़िर...
_____अमानत होती हैं बहनें!
-Elder Brother
पता है हमें उस 'बंद जगह' के लिए तुम कभी बनी ही नहीं थी। तुम तो वो थी जो नवोदय की हज़ार पाबन्दियों के बीच चोरी-छिपे हॉस्टल की सबसे ऊंची वाली छत पे चढ़ के क्षितिज तक फ़ैले उन्मुक्त आकाश को घण्टों निहारने में ही खुशी महसूस करती थी, तुम वो थी जो किसी रोज़ पानी की सबसे ऊँची वाली टंकी में चढ़कर उन्माद से चिल्लाने के ख़्वाब देखती थी, जो चुपचाप आइने के सामने बेतरतीब ढंग से चेहरा बनाती-बिगाड़ती और उसी में खुश हो लिया करती थी , तुम वो थी जो झाड़ू में बैठकर उड़ जाना चाहती थी और तुम वो भी थी जो छोटी लकड़ी को जादुई छड़ी नुमा पकड़ कर एक दिन सबको 'निरस्त्र' कर देना चाहती थी।
पता है 'हैरी पॉटर' की जिस काल्पनिक दुनिया में जीना पसंद है ना तुम्हे, यहां 'JNU' में काफी हद तक वैसी ही दुनिया देखता हूं मैं। Library है यहां पूरे 9 माले की,और हाँ अपना 'हिन्दी सेक्शन' पाँचवे माले पर है। किताबों के बीच अक्सर घूमते हुए देखता हूँ तो दिल्ली, दिल्ली जैसे लगती ही नहीं। चारो ओर हरियाली ही हरियाली है। कहीं दूर किन्तु स्पष्ट दिखाई देती है यहाँ से ऐतिहासिक 'कुतुबमीनार'। बस स्वर्ग की तरह ही लगता है ये नज़ारा। हज़ारो किताबें अटी पड़ी हैं यहाँ। तुम्हे किताबों से विशेष लगाव रहा है न! वास्तव में ये तुम्हारी ही जगह होनी चाहिये थी।
आना कभी यहाँ घूमनें, अच्छा लगेगा! 'PSR' की बेडौल चट्टानों पर गाढ़ी मीठी चाय पीनी हो, या 'साबरमती ढाबा' की स्पेशल 'कचौरी विद छोले', सब खिलाएंगे तुम्हे।
___आख़िर...
_____अमानत होती हैं बहनें!
-Elder Brother
Tuesday, 15 August 2017
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