हमसे मिलिए!



मेरी सोच को सहारा सा मिल गया ! 


एक तेरे आ जाने के बाद !!





सभी विद्वान पाठक गणों को महेन्द्र सिंह का नमस्कार.

                 चलिए आप ने अपना कीमती समय निकाला है तो हमसे भी मिलते चलिए.


मैं हूँ महेन्द्र  । उत्तर -प्रदेश का एक सीधा सादा-सा इंसान । गाँव का रहने वाला एक मध्यम-वर्गीय किसान का बेटा, शकल - सूरत से देशी गाँव छाप. और कुछ खास है ही नहीं बताने लायक.
बड़े-बड़े सपने लेके मैं भी पैदा हुआ था. सोचा था किसी अच्छे विश्वविद्यालय में प्रोफेसर बनूँगा । डाक्टर-इंजीनियर तो सब बनते हैं.. मैं तो बस उन्हे बनाउँगा।
...... एक पल में सारे सपने बिखर ज़ाते हैं, जब आप घर के बड़े बेटे होते हो, और जि़न्दगी का बीसवाँ बसन्त आपको आपकी जिम्मेदारी का एहसास करा जाता है।   ....और आप दौड़ पड़ते हो एक अदद चपरासी की नौकरी के लिए....
.....शायद बड़ा लक्ष्य और बड़ा सपना भी अमीरों के हिस्से में आता है।




      
महेंद्र सिंह 

2 comments:

  1. मुझे अपने सुझाव एवं मार्गदर्शन अवश्य दें

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  2. बेहतर प्रयास हिंदी के क्षेत्र में .

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